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Showing posts from July, 2019

👢तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव 👢

तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव :--यह संसार तीन विधाओं  /
                                    शक्तियों पर निर्भर करता है ।जिनमे सबसे ज्यादा विश्वसनीय शक्ति यंत्र की  है  जो मूर्त
रूप है, यह भौतिक शक्ति है ,चश्मदीद है कल-युगी शक्ति
है ।यह शक्ति सभी को आश्वस्त करती है, प्रभावित करती है ।अन्य दोनों शक्तियां अप्रत्यक्ष, अदृश्य हैं जिन्हें  मंत्र और  तंत्र केनाम संज्ञायित किया किया गया है ।इन पर लोग विश्वास नहीं करते।परन्तु ऐसा भी नही है कि लोग इन्हे नगण्य अथवा उपेक्षित करते हैं ।इन दोनो शक्तियो में मंत्र ऐसी शक्ति है जो
वेद मंत्रों पर आधारित है, आध्यात्मिक है, कल्याणकारी है, विश्वसनीय और हितकारी साबित हुई है ।और तीसरी शक्ति तांत्रिक क्रियाओं से सम्पन्न है ।यह सर्व विदित है कि तांत्रिक
क्रियाओं द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धि त्वरित और अल्पकालिक फल देने वाली होती है । तो ऐसे कुछ उपाय सुझाए गए हैं ।जिन का क्रियान्वयन करके आप लाभान्वित हो सकते हैं ।

    👑हत्था जोड़ी  :-- तंत्र विद्या की महत्वपूर्ण वस्तु है ।बहुत प्रभावशाली है ।यदि हत्था जोड़ी को अभिमंत्रित करके इसका प्रयोग किया जाए, तो इतना अधिक ला…

👒विदेश यात्रा योग के उपाय 👒

👒विदेश यात्रा :-संसार के प्रत्येक प्राणी के मन मे एक                       उत्कंठा पलती रहती है कि वह अपने कार्य निवृत्ति के बाद घर से बाहर निकले ।ऐसे में कभी कभी आर्थिक संकट उसे कही जाने से विवश कर देता है और वह अपने मन को शांत कर लेता है और अपने नसीब पर छोड़कर अपने काम मे लग जाता है । कुछ लोग भ्रमण के और कुछ व्यवसाय अथवा जॉब के लिए विदेश जाने की इच्छा करते है ।तो इस अध्याय में इसी से सम्बंधित कुछ उपाय सुझाए गए हैं ।ईश्वर आपकी मनोकामना अवश्य पूरी करेंगे ।

    👒 यदि आप को विदेश यात्रा करनी है तो आप यह उपाय कर सकते हैं।किसी भी शुभ मुहूर्त मे पूर्व मुखी होकर लाल वस्त्र पर मां लक्ष्मी की तस्वीर के साथ विदेश यात्रा यंत्र को स्थान दें ।उसके बराबर में गुलाबी वस्त्र पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर 300ग्राम चने की दाल की ढेरी बनाए।उस पर तीन पीले अकीक और एक अभिमंत्रित लघु नारियल रखें ।फिर उसको तिलक -बिन्दी करके धूप  दीप के साथ भोग अर्पित करे ।तत्पश्चात लाल अथवा पीले अकीक की माला से ऊं ऐं
ह्रीं श्रीं क्लीं हूं सौःजगतप्रसूतयै नमः मंत्र की  माला का जप करें ।जप के बाद एक अकीक को कलावे से  गांठ लगा दे…

🍦समाज में नारी की भूमिका 🍦 (भाग -दो )

🍦नारी का स्वरूप :-- नारी जगत जननी होते हुए जल
                             स्वरूपा है अर्थात जैसा माहौल वैसा इसका स्वरूप होजाता है ।यह अत्यंत परिवर्तन शील प्राणी है ।जब शिशु रूप मे होती है तब माता-पिता, भाई-बहन की परछाई मात्र रहती है, ससुराल में पति, सास-ससुर और जेठ -जेठानी की छाया बनकर रहती है ।जिस प्रकार जल का अपना कोई रंग नहीं होता, जो रंग मिला दो  वही जल का रंग हो जाता है ।अर्थात नारी एक महानता की मिसाल होती है ।नारी पूज्यनीय होती है ।अपने लिए दुखोंकाभंडारऔरदूसरो के लिए सुख का खजाना होती है ।नारी का विधवा रूप किसी के हृदय को झंझोर सकता  है। इस अंक में नारी के वैधवय रूप
का वर्णन करेंगे ।

    🍦वह घड़ी नारी के जीवन की सबसे दुखद घड़ी होती है जब उसका शौहर उससे सदा के लिए अलग होता है ।अर्थात पति की मृत्यु के पश्चात वह अपने आप को निरीह समझने लगती है और उसे अपने पति का आचरण रहरह कर याद आता है ।ऐसे मे विधवा नारी को अपने पति के आचरण के अनुकूल कार्य करने चाहिए ।अर्थात जिस तरह पति की जीवित अवस्था में उसके मन के अनुकूल आचरण करती थी, उसी प्रकार उसके मरने पर भी करना चाहिए ।धर्म का ऐसा आचरण करने…

🐦समाज में नारी की भूमिका 🐦

🐦विवाहित नारी :--नारी समाज की धुरी है यदि यह अस्त
                  व्यस्त है तो समाज का का कोई औचित्य ही नही है ।बिना इसके मनुष्य अधूरा है तो समाज भी अधूरा के साथ साथ अस्तित्वहीन है ।जब जब नारी की उपेक्षा की गई है तब -तब अवसाद उत्पन्न हुआ है ।भारत मेंनारी की पूजा व सम्मान होता आया है इसलिए कहा गया है -यत्र नारी पूजयते,तत्र देवता रमयते।इसी संदर्भ मेंइस अध्याय में नारी की जीवन चर्या से सम्बंधित कुछ गुण-दोष वर्णन किया गया है कि-
    🐦नारी के कर्तव्य :-विवाहित नारी के लिए पतिव्रत धर्म के समान कुछ भी नही है इसलिए मनसा बाचा कर्मणा पति के सेवापरायण होना चाहिए ।नारी के लिए पतिपरायणता ही मुख्य धर्म है ।इसके अलावा सब धर्म गौण है ।महर्षि मनु ने साफ लिखा है कि स्त्री के लिए पति की आज्ञा के बिना यज्ञ तप, व्रत, उपवास आदि कुछ भी न करने चाहिए ।स्त्री केवल पति की सेवा सुश्रूषा से उत्तम गति पाती है तथा स्वर्ग लोक मे देवता गण भी उसकी महिमा का बखान करते हुए उसकी प्रशंसा करते हैं।जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना यज्ञ, तप, व्रत, उपवास आदि करती है, वे अपने पति की आयु का क्षरण करती है तथा स्वयं नर्क  में ज…