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🐦समाज में नारी की भूमिका 🐦

🐦समाज में नारी की भूमिका 🐦

🐦विवाहित नारी :--नारी समाज की धुरी है यदि यह अस्त
                  व्यस्त है तो समाज का का कोई औचित्य ही नही है ।बिना इसके मनुष्य अधूरा है तो समाज भी अधूरा के साथ साथ अस्तित्वहीन है ।जब जब नारी की उपेक्षा की गई है तब -तब अवसाद उत्पन्न हुआ है ।भारत मेंनारी की पूजा व सम्मान होता आया है इसलिए कहा गया है -यत्र नारी पूजयते,तत्र देवता रमयते।इसी संदर्भ मेंइस अध्याय में नारी की जीवन चर्या से सम्बंधित कुछ गुण-दोष वर्णन किया गया है कि-
    🐦नारी के कर्तव्य :-विवाहित नारी के लिए पतिव्रत धर्म के समान कुछ भी नही है इसलिए मनसा बाचा कर्मणा पति के सेवापरायण होना चाहिए ।नारी के लिए पतिपरायणता ही मुख्य धर्म है ।इसके अलावा सब धर्म गौण है ।महर्षि मनु ने साफ लिखा है कि स्त्री के लिए पति की आज्ञा के बिना यज्ञ तप, व्रत, उपवास आदि कुछ भी न करने चाहिए ।स्त्री केवल पति की सेवा सुश्रूषा से उत्तम गति पाती है तथा स्वर्ग लोक मे देवता गण भी उसकी महिमा का बखान करते हुए उसकी प्रशंसा करते हैं।जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना यज्ञ, तप, व्रत, उपवास आदि करती है, वे अपने पति की आयु का क्षरण करती है तथा स्वयं नर्क  में जाती हैं ।इसलिए पति की आज्ञा के बिना यज्ञ, तप, व्रत, उपवास आदि कुछ   भी   न   करने
चाहिए । दूसरे लौकिक कर्मों की बात ही अलग है ।स्त्री के लिए पति ही तीर्थ है, पति ही व्रत है, पति ही देवता एवं परम पूज्यनीय गुरु भी पति ही है ।ऐसा होते हुए भी जो स्त्री दूसरे को गुरू बनाती है, वह घोर नर्क को प्राप्त करती हैं।जो लोग परसित्रयों के गुरू बनते हैंअथवा उन्हे अपनी शिष्या या भक्त बनाते हैं।वे इस पाप के कारण घोर दुर्गति को प्राप्त करतेहैं।आज कल बहुत से लोग साधु, महनत और भक्त के वेष में कहते हुए मिलते हैं-"बिना गुरु के ज्ञान कहां? ,बिना गुरु के मुक्ति कहां?," ऐसा भ्रम फैलाकर भोली-भाली सचचरित्र पतिव्रताओं को भ्रमित कर उनसे धनऔर उनके सतीत्व से खिलवाड़ करते हैं।और घोर नर्क के भागी बनते हैं ।ऐसे चेली बनाने वाले गुरुओं और महातमाओं से माता और बहिनों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है ।ऐसे पुरुषों का मुख देखना भी धर्म नही है ।मनु आदि विद्वानों ने स्त्रियों की मुक्ति तो केवल पतिव्रत से ही बताई है ।जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है -
  "एकड़ धर्म एक व्रत नेमा ।कायं बचन मन पति पद प्रेमा।।
   मन बच कर्म पतिहि सेवकाई।तियहि न यहि सम आन उपाई
  बिनु श्रम नारि परमगति लहई।पतिव्रतधर्म छाड़ि छल गहई।।

    'वही स्त्री पतिव्रता है,जोअपने मनसे पति का हित-चिनतन करती है, वाणी से सत्य, प्रिय और हित के वचन बोलती है, शरीर से उसकी सेवा एवं आज्ञा पालन करती है ।जो पतिव्रता
होती है वह स्त्री पति सहित उत्तम गति को प्राप्त होती है और उसी को लोग साध्वी प्रज्ञा कहते हैं।

   "पतिं या   नाभिचरति      मनोवागदेहसंयता ।
   सा भर्तृलोकमापनोति सदभिः साध्वीति चोचयते।।"
                                               (मनु05/165 )
व्याख्या:-- जो स्त्री मन,वाणी औरशरीर को वश में रखती हुई पति के अनुकूल आचरण करती है प्रतिकूल आचरण कभी नही करती, वह मृत्यु के पश्चात पतिलोक को प्राप्त होती है और सज्जन पुरूष उसे साध्वी  (पतिव्रता ) कहते हैं ।
    🐦"-अनृतावृतुकाले च मंत्र संस्कारकृतपतिः।
          सुखसयनितयं दातेह परलोके च योषितः।।"

 
   🐦व्याख्या :-स्त्रियों के लिए इस लोक और परलोक में                             पति ही नित्य सुख देने वाला है ।
         इसलिए स्त्रियों को किंचितमात्र भी पति के प्रतिकूल आचरण नही करना चाहिए ।जो नारी ऐसा करती हैंअर्थात
पति की इच्छा और आज्ञा के विरुद्ध  चलती है,उसको इस लोक में निन्दा और मरने पर नीच गति की प्राप्ति होती है ।
           🐦पति प्रतिकूल जनम जहॅ जाई ।
                विधवा  होइ    पाइ    तरुनाई।।
         इस प्रकार पति की इच्छा के विरुद्ध चलने वाली की
ही यह गति लिखी है ।फिर जो नारी दूसरे पुरुषों के साथ रमण करती है, उसकी घोर दुर्गति होती है ।

       🐦पति बंचक  परपति  रति  करई ।
           रौरव  नरक  कल्प  सत  परई  ।।
      व्याख्या :-- अतः स्त्रियों को जाग्रत की तो बात ही कुछ और है, स्वप्न में भी पर। पुरुष का चिन्तन नहीं करना चाहिए ।वही उत्तम पतिव्रता है, जिसके दिल में ऐसा भाव है--
  उत्तम के  अस  बस  मन  माहीं ।
  सपनेहुं  आन  पुरूष   जग  माहीं।।
 
      पति यदि कामी हो, शील एवं गुणों रहित हो तो भी साध्वी  यानि पतिव्रता को ईश्वर के समान मानकर उसकी
सदा सेवा-सुश्रूषा करनी चाहिए  ।

   (विशीलः कामवृतो वा गुणैवां परिवर्जितः ।
    उपचर्यः स्त्रीया साधवया सततं देववत् पतिः।।)
                                           (मनु05/154)

             अपमान तो अपने पति काकभी नही  करना चाहिए; क्योंकि जो नारी अपने पति का अपमान करती है, ।वह परलोक में जाकर महान दुःखों को भोगती है ।

  🐦बृधद रोगवस जड़ धनहीना।अंध बधिर क्रोधी अति दीना।
      ऐसेहुं पति कर किए अपमाना।  नारि पाव जमपुर दु:ख नाना ।।

     🐦साध्वी स्त्रियों को पुरूषों और स्त्रीयो के जोसामानय धर्म बतलायेहैं,उनका भी पालन करना चाहिए ।पतिव्रतधर्म को जानने वाली स्त्रीयो को अपने पति से बड़ो -सास,ससुर आदि की पति के समान सेवा और आज्ञा पालन करने चाहिए, क्योंकि वे पति के पालक हैं।पतिव्रतधर्म के आदर्श स्वरूप सीता, सावित्री आदि नेऐसा ही किया है ।जब सावित्री अपने पति के साथ वन मे गई तब पति की आज्ञा होने के बाद भी सास-ससुर की आज्ञा लेकर ही गई थी ।श्री सीता जी भी रामके साथ माता कौशल्या से आज्ञा, शिक्षा और आशीर्वाद
लेकर ही गई थीं।
          साध्वी स्त्रीयो को उचित है कि अपने लड़के-लड़कियों को आचरण एवं वाणी द्वारा उत्तम शिक्षा दें ।माता-पिता जो आचरण करते है, बालकों पर उनका विशेष असर पड़ता है ।अतः  स्त्रीयो को झूठ कपट आदि दुराचार एवंकाम-क्रोध आदि दुर्गुणों का  सर्वथा त्याग  के उत्तम आचरण करने चाहिए ।बहुत -सी स्त्रियां लड़कियों को 'रांड'और लड़कों को 'तू मर जा'    ' तेरा सत्यानाश  हो जाय ',इत्यादि कटु और दुर्वचन बोलती हैं एवंउनको भुलाने के लिए  'मैं तुझे अमुक   चीज मंगवा दूंगी, ' इत्यादि झूठा विश्वास दिलाती हैंऔर बिल्ली  आई ',इत्यादि झूठा भय दिखाती हैं ।इनसे बहुत नुकसान होता है ,अतएव ऐसी बातो से स्त्रियों को बचना चाहिए ।बालक का दिल कोमल होता है, अतःउसमें यह बातें जम जाती हैं और वह झूठ बोलना, धोखा देना आदि सीख जाता है एवं अत्यन्त भीरु और दीन बन जाता है ।बालकों के दिल में वीरता, धीरता
और गंभीरता उत्पन्न हो ऐसे ओज और तेज  से भरे हुए  सच्चे बचनों द्वारा उनको आदेश देना चाहिए ।उनमें बुध्दि और ज्ञान की उत्पत्ति के लिए सत शास्त्र की शिक्षा देनी चाहिए ।बालकों को गाली आदि नहीं देनी चाहिए, क्योंकि गाली देना उनको गाली सिखाना है ।अश्लील गंदे, कड़वे अपशबदोंका प्रयोग भी नही करना चाहिए ।संग का बहुत असर पड़ता है ।पशु-पक्षी भी संग के प्रभाव से सुशिक्षित और कुशिक्षित हो जाते हैं ।
          सुना जाता है कि मंडन मिश्र के द्वार पर रहने वाले पक्षी भी शास्त्र के वचन बोला करते थे ।देखा भी जाता है कि गाली बकने वालो के पास रहने वाले पक्षी भी गाली बका करते हैं।अतः सदा सत्य प्रिय,सुन्दर और मधुर हितकर वचन ही बहुत प्रेम से, धीमे स्वर से और शांति से बोलने चाहिए ।बालकों सम्मुख पति के साथ हंसी-मजाक एवं एक शैय्या पर
सोना  बैठना कभी नही करना चाहिए ।जो स्त्रीयां ऐसा करती
हैं, वे अपने बालकों को व्यभिचार की शिक्षा देती हैं ।

         🍍परपुरूष निषेध :--    स्त्री  को किसी भी गैरमर्द या
                                         परपुरूष दर्शन, स्पर्श, एकान्त
                               
      वासएवं            उसके चित्र का भी चिन्तन नहीं करना चाहिए ।लोभ, मोह, शोक ,हिंसा, दम्भ, पाखंड आदि से सदा
अलग रहना चाहिए और उत्तम गुणों एवंआचरणों के लिए गीता, रामायण, भागवत, महाभारत एवं सती-साधवी स्त्रीयो के चरित्र पढ़ने का अभ्यास रखना चाहिए औरउनके अनुसार ही बालकों को शिक्षा देनी चाहिए ।

      🍍बच्चों के साथ व्यवहार :--बच्चों को खिलाने -पिलाने आदि मेमे भी अच्छी शिक्षा देनी  चाहिए । मदालसा  ने   अपने
बाल्को को बाल्यकाल से ही ज्ञान और वैराग्य की शिक्षा देकर
उन्हें उच्च श्रेणी के बना दिया था ।बच्चे बुरे बालकों  एवं बुरे
स्त्री -पुरूषों का संगकरके कुशिक्षा ग्रहण  न  कर लें। इसके
लिए माता-पिता को विशेष ध्यान रखना चाहिए ।हाथ के बुने
स्वदेशी वस्त्र स्वयं पहने और बालकों को भी पहनाने चाहिए
बच्चों को एसी शिक्षा देनी चाहिए ।जिससे उनका प्रेम श्रंगार
आदि में न होकर ईश्वर और उत्तम शिक्षा आदि में हो।

     🍍बच्चों के साथ सावधानियां :--जहां बच्चों से मां प्यार
                                               करती है  वही       कुछ
सतर्कता  अथवा सावधानी की आवश्यकता है।बालकों को गहने पहनाकर अधिक नही सजाना चाहिए ।क्योंकि इससे स्वास्थ्य की हानि होती है, प्राणों का भी खतरा हो जाता है ।
बल बढ़ाने के लिए व्यायाम और बुध्दि की बृधदि के लिए विद्या एवं उत्तम शिक्षा देनी चाहिए ।सिनेमा आदि देखने का व्यसन और बीड़ी सिगरेट,तमब,भांग,गांजा,सुलफा आदि मादक वस्तुओं का सेवन करने की आदत न पड़ जाये, इसके लिए माता-पिता को विशेष ध्यान रखना चाहिए ।लड़की और लड़के के खान-पान, लाड़ प्यार और व्यवहार में भेदभाव नही रखना चाहिए ।प्रायः स्त्रीयां खान पान और भरण-पोषण मेंजो
लड़कों के साथ जैसी व्यवहार करती है वैसा व्यवहार लड़कियों के साथ नही करती है ।उनका अपमान करती हैं ।
जो सर्वथा अनुचित है ।बच्चो के साथ समता का व्यवहार करना चाहिए ।यदि ऐसा नहीं करते तो माता पिता पाप के भागी बनेंगे ।

         🍍अनर्गल विश्वास :--बहुत सी स्त्रियां भूत प्रेत देवता, पीर आदि के भय कर जाती हैं ।यह यहां अच्छी तथा दुरस्त सोच की आवश्यकता है ।बहकावे मे आने की आवश्यकता नही है ।इस प्रकार की समस्या हिस्टीरिया आदि रोग उत्पन्न होने से होती
हैं ।
          🍍वेश्यावृत्ति, व्यभिचारिणी,लड़ाई झगड़ा करने वाली, निर्लज्ज और दुष्टा स्त्रियों का संग कभी नही करना चाहिए ।परन्तु उनमे घृणा और द्वेष भी नही करना चाहिए ।उनके अवगुणों से ही घृणा करनी चाहिए बड़ोंकी,दुखियों की और घर पर आए हुए अतिथियों कीएवंअनाथों की सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ।
          🍍यज्ञ,दान, तप, सेवा, तीर्थ, व्रत, देवपूजन आदि पति के साथ उसकी आज्ञा के अनुसार उसके संतोष के लिए अनुगामिनी होकर ही करें ।स्वतन्त्र होकर नहीं ।पति का जो इष्ट है वही स्त्री का भी है ।अतएव पति के बताये हुए इष्टदेव परमात्मा के नाम का जप और रूप का ध्यान करना चाहिए ।स्त्री को पति ही गुरु है ।यदि पति को ईश्वर की भक्ति अच्छी नलगतीहो  तो पिता के घर से प्राप्त शिक्षा के अनुसार भी ईश्वर की भक्ति, बाहरी भजन, सत्संग, कीर्तन आदि न करके गुप्त रूप से मन मे ही करें ।भक्ति का मन से विशेष सम्बन्ध होने के कारण यह जहां तक बन  सके गुप्त रूप से ही करनी चाहिए; क्योंकि गुप्त रूप से की गई भक्ति विशेष महत्व की होती है ।

       🍍पति जो कुछ भी कहे उसका अक्षरशः पालन करें;किन्तु जिस आज्ञा के पालन से पति नरक का भागी हो, उसका पालन नही करना चाहिए ।जैसे पति काम, क्रोध, लोभ , मोह वश चोरी या किसी के साथ व्यभिचार करने, किसी को विष पिलाने, जान से मारने, भ्रुण हत्या, गौहतया आदि घोर पाप करने के लिए कहें तो वह न करें ।ऐसी आज्ञा का पालन न करने से अपराध भी समझा जाए  तो भी पति को नर्क से बचाने के लिए उसकपालन नही करना चाहिए ,जिस काम से पति का परम हित हो वह काम स्वार्थ छोड़कर करने की सदा चेष्टा रखनी चाहिए ।

      🍍विधवा स्त्रीयो की सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए; क्योंकि अपने धर्म में रहने वाली विधवा नारी देवी के समान है ।उसकी सेवा सुश्रूषा करने, उसके साथ प्रेम करने से महिला इस लोक मे सुख परलोक मे उत्तम गति पाती है ।जो स्त्री विधवा को सताती है, वह उसकी हाय से इस लोक में दुःखिया हो जाती है और मरने पर नर्क में जाती है ।

     🍍उपरोक्त बताए हुए पतिव्रतधर्म को स्वार्थ छोड़कर पालन करने वाली साध्वी स्त्री इस लोक में परम शान्ति एवं परम आनंद को प्राप्त होती है और मरने के बाद परम गति को प्राप्त होती है ।

   🍍🍍शासत्रोकित के साथ अगले भाग में विधवा एवं कुवांरी लड़कियों के लिए कुछ लाभदायक  सुझाव प्रस्तुत किये जाएंगे । कृपया इसे पूर्ण मनोयोग से पढ़ें,और अच्छा लगे तो आचरण करें ,लाइक,शेयर एवं कमेंट  करें अथवा डिसलाइक,कमेंट करना न भूलें ।धन्यवाद ।🍍🍍

                                 🍦एकता  झा 🍦
                                               'समाज सेविका '

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स्त्रियों के विषय मे चर्चा करेंगें।
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